I Love Mohammad 2025″ पर मचा बवाल: क्यों बना मोहब्बत का नारा एक राष्ट्रीय मुद्दा?

सितंबर 2025 की शुरुआत में एक नारा अचानक पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया — “I Love Mohammad 2025″। यह कोई राजनीतिक घोषणा नहीं थी, न ही किसी पार्टी का प्रचार। यह नारा एक धार्मिक भावनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, लेकिन कुछ ही दिनों में यह एक बड़ा सामाजिक, राजनीतिक और क़ानूनी मुद्दा बन गया। सवाल ये है कि आखिर एक लाइन “I Love Mohammad 2025” पर मचा बवाल: क्यों बना मोहब्बत का नारा एक राष्ट्रीय मुद्दा?” इतनी बड़ी बहस का कारण क्यों बन गई?

सितंबर 2025 में भारत के कई राज्यों में “I Love Mohammad 2025” नामक विवाद ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में हलचल मचा दी। यह विवाद एक साधारण स्लोगन या धार्मिक अभिव्यक्ति से शुरू होकर अब FIR, गिरफ्तारी, प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव तक जा पहुंचा है।

कैसे शुरू हुआ “I Love Mohammad 2025” विवाद?

4 सितंबर को कानपुर (उत्तर प्रदेश) में बारावफात के जुलूस के दौरान कुछ युवाओं ने “I Love Mohammad 2025” लिखा हुआ बोर्ड सार्वजनिक मार्ग पर लगा दिया। इस पर आपत्ति जताई गई कि यह स्थान रामनवमी शोभा यात्रा का पारंपरिक रास्ता है। इसके बाद विरोध हुआ और प्रशासन ने बोर्ड हटवा दिया।

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पुलिस ने दावा किया कि “I Love Mohammad 2025” स्लोगन को लेकर FIR दर्ज नहीं की गई, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा, अनुमति के बिना संरचना लगाना, और अन्य धर्म के पोस्टर हटाना जैसे आरोपों में कार्रवाई की गई है।

I Love Mohammad 2025
I Love Mohammad 2025

कौन-कौन सी धाराएँ लगाई गईं?

विभिन्न राज्यों में हुई घटनाओं में अलग-अलग धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। यहाँ प्रमुख मामलों और उन पर लगाई गई धाराओं का विवरण है:

स्थान प्रमुख धाराएँ (Sections) विवरण
काशीपुर (उत्तराखंड) BNS की धाराएँ: 190, 191(2), 191(3), 232, 121(1), 132, 221, 324(3), 351(2), 352 सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सरकारी संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक शांति भंग
पिलीभीत (UP) धमकी, शांति भंग, IPC सेक्शन 506, 153A, 505(2) पुलिस अधिकारी को “हाथ काटने” की धमकी
कानपुर साम्प्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करना, धारा 153A, 295A, 147, 149, 188, 427 बिना अनुमति बोर्ड लगाना और धार्मिक पोस्टर हटाना
बरेली धमकी, दंगा, पुलिस से विरोध IMC नेता द्वारा SHO को धमकी

इन सभी मामलों में पुलिस का कहना है कि I Love Mohammad 2025″ स्लोगन पर सीधा मामला नहीं बना है, बल्कि उसके चारों ओर हुई गतिविधियों पर कानून के तहत कार्रवाई हुई है।

गिरफ्तारियाँ और विवादित बयान

काशीपुर में पुलिस पर हमला करने और सरकारी संपत्ति नष्ट करने के आरोप में 7 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया।

पिलीभीत में IMC नेता ने पुलिस अफसर को धमकी दी, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद धारा 506 के तहत मामला दर्ज किया गया।

बरेली में SHO को धमकाने के मामले में Dr. Nafees पर FIR दर्ज की गई।

इन घटनाओं के वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिससे “I Love Mohammad” विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा।

सोशल मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

सोशल मीडिया पर #ILoveMohammad2025 ट्रेंड करने लगा। लाखों लोगों ने इस स्लोगन को धार्मिक प्रेम और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा।

वहीं कई जगहों पर “सर तन से जुदा” जैसे विवादित नारे भी लगाए गए, जिससे प्रशासन और सतर्क हो गया।

I Love Mohammad 2025
I Love Mohammad 2025

राजनैतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने साफ तौर पर कहा कि “I Love Mohammad 2025” कहना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब “I Love Ram” या “I Love Krishna” कहने में कोई दिक्कत नहीं है, तो फिर “I Love Mohammad” पर इतना हंगामा क्यों?

दूसरी तरफ कुछ हिंदू संगठनों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय जानबूझकर ऐसे स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगा रहे हैं, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो।

सोशल मीडिया भी इस विवाद में पीछे नहीं रहा। ट्विटर (अब X) पर #ILoveMohammad2025 ट्रेंड करता रहा, जहां लाखों लोगों ने इसे अपने धर्म के प्रति प्रेम और श्रद्धा की अभिव्यक्ति बताया। वहीं कुछ कट्टरपंथी समूहों द्वारा “सर तन से जुदा” जैसे नारे भी लगाए गए, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

I Love Mohammad 2025
I Love Mohammad 2025

निष्कर्ष

“I Love Mohammad 2025” विवाद ने यह दिखा दिया कि धार्मिक भावनाओं, सार्वजनिक अभिव्यक्ति और कानून के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है।

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जहाँ एक पक्ष इसे अपनी धार्मिक पहचान और मोहब्बत का प्रतीक मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे सार्वजनिक व्यवस्था और परंपराओं के खिलाफ मानता है।

कानून का दायित्व है कि वह निष्पक्ष रहे और यह सुनिश्चित करे कि किसी की भावनाएँ आहत न हों लेकिन साथ ही कानून का उल्लंघन भी न हो।

इसी बीच, यह भी जरूरी है कि “I Love Mohammad 2025” जैसे स्लोगन को राजनीतिक लाभ या धार्मिक उन्माद का हथियार न बनाया जाए।

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